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Monday, August 27, 2012

जैसे करेगा वैसा ही भरेगा

 नौकरी से रिटायर होने के बाद किरपालू और उसकी बीवी धन्नो ने सोचा कि रामपुर में जाकर बसा जाय। रामपुर में ही उसका इकलौता बेटा मुरली अपने इकलौते बेटे गप्पू और पत्नी दुलारी के साथ रहता था। वहाँ जाकर किरपालू ने अपना मकान बनवाया और मुरली को जो किराए के मकान में रहता था अपने साथ रहने को कहा। सब कुछ ठीक चल रहा था। अचानक एक दुर्घटना में धन्नो की मृत्यु हो गई। धन्नो के मर जाने के बाद किरपालू तो एकदम गुमसुम हो गया। उसके ग़म में वो स्वयं बीमार पड़ गया।
                                     बाप की यह हालत देख कर मुरली ने उसकी खूब सेवा करनी शुरु कर दी और हर प्रकार से देखभाल की। पिता ने भी देखा कि बेटा कितना ख्याल कर रहा है। किरपालू ने एक दिन मुरली को अपने पास बुलाया और अपनी सारी जायदाद उसके नाम करदी। सब कुछ मिल जाने के बाद अब मुरली के बरताव में परिवर्तन आना शुरु हो गय। वो बाप की अवहेलना करने लगा और दुलारी से भी कह दिया कि बापू जब भी कुछ मागें उसको मत देना।किरपालू की हालत दिन प्रति दिन बिगड़ती चली गई। एक ओर स्वास्थ्य खराब रहने लग और दूसरी ओर मुरली ने उसके लिए घर से बाहर टूटी हुई खाट डाल दी और ओढ़ने के लिए उस पर एक टाट बिछा दिया। किरपालू अब अपने दिन वहीं पर काटने लगा। दुलारी का व्यवहार तो मुरली से भी खराब था। वो तो बात बात पर गाली पर उतर आती थी। गप्पू यह सब देख रहा था ओर उसको कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।
                           आख़िर एक दिन किरपालू की मृत्यु हो गई। बाप के मरने पर दुनिया को दिखाने के लिये मुरली बहुत रो रहा था। दुलारी के तो आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। यह सब देख कर गप्पू एक अजीब उलझन में पड़ गया।दाह संस्कार करने के बाद मुरली घर लौटा। जब अड़ौसी पड़ौसी चले गए तो दुलारी से अकेले में बात कर के बाहर आया और खाट और टाट को उठाने लगा। गप्पू के पूछने पर कि वो उन चीज़ों का क्या करेगा तो मुरली बोला कि वो उसको बाहर फैंक देगा।

इतना सुनना था कि गप्पू एकदम बोल उठा।

"पिताजी उस खाट और टाट को संभल कर रख लीजिएगा। उसे मत फैंकना क्योंकि जब आप बूढ़े होंगे तो यह सब आपके काम आएँगे।"

जिन्दगी का सबक :जैसा आप दूसरो के साथ करोगे वैसा ही व्यव्हार पाओगे.

sabhar:.hindiclub

Monday, September 6, 2010

लालच बुरी बला...

एक बहुत ही लालची और स्वार्थी वैद्ध था। उसके इसी स्वभाव के कारण लोग उससे इलाज कराने नहीं आते थे।इसी निराशा में एक दिन वैद्ध एक पैज के नीचे जाकर बैठ गया।तभी उसकी नजर पेड की कोटर में गई उसने देखआ कि वहां एक सांप सो रहा है उसने सोटा यदि यह साम्र किसी को डस ले तो वह जरूर मेरे पास इलाज कराने आयेगा और मैं उससे खूब पैसे वसूलूंगा।वहां पास में एक छोटा लडका खेल रहा था।बैद्ध उसके पास जाकर बोला,उस पेड की कोटर में सुंदर मैना सो रही है,तुम चाहो तो उसे पकडकर पिंजरे में रख सकते हो।लडका चहककर बोला,मैं इस मैना को पालूंगां।वैद्ध उस लडके को साथ लेकर वृक्ष के पास लेकर गया और कोटर की ओर संकेत कर बोला मैना इसके अंदर है।हाथ डालकर निकाल लो।लडके ने कोटर में हाथ डाला
                          हाथ बाहर निकालने पर उसने देखा कि उसके हाथ में मैना नहीं बल्कि सांप है।वह बुरी तरह से डर गया।उसने सांप को तत्काल फेंका....बह सांप वैद्ध के सिर पर जाकर गिरा और उसके गले में लिपट गया।वैद्ध ने सांप को हटाने के बहुत प्रयास किया लेकिन नाकम रहा और आखिर कार सांप ने उसे डस लिया।लेकिन सांप जहरीला नहीं था फिर भी डर के मारे वैद्ध बेहोश हो गया।लडका दौडकर गांव को बुला लाया,होश आने पर वैद्ध अपनी करनी पर बहुत पछताया....उसे अपने किये की सजा मिल गई थी...

सबक
         दोस्तों लालच का परिणाम सदा ही बुरा होता है।अगर हम दूसरों के बारे में गलत सोचेगें तो हमारे साथ ही गलत होगा