Friday, August 20, 2010

बुराई के कारणों को नष्ट करों....

क बार मगध के महामंत्री चाणक्य राजकाज संबंधी परामर्श के लिए सम्राट चंद्रगुप्त से मिलने जा रहे थे।रास्ते में उनके पांव में कांटा चुभ गयाऔर उनके मुंह से जोर से चीख निकल गई।उन्होने झुककर उस    कंटीले पौधे को देखा ,फिर कुल्हाडी मंगवाई और अपने हाथेों से इस पौधे को उखाड कर फोंक दिया।उखाड कर फेंकने के बाद उन्होने उस पौधे की जड़ों को भी जमीन से निकाला औऱ उन्हें जला दिया । इसके बाद उन्होंने अपने शिष्यों छाछ मंगा कर उसे उसकी जड़ो में डाल दिया ।यह देखकर एक शिष्य ने जिज्ञासावश उनसे पूछा"गुरूजी आपने मात्र एक कंटीले पौधे को निकालने के लिए इतनी मेहनत क्यों की?" यदि आप आदेश देते तो हम तुरंत ही यह काम कर देते ।शिष्य की बात को सुनकर चाणक्य बोले....मैने यह काम इसलिए किया क्योंकि मैं बुराई को जड़ से मिटा देना चाहता था....।जब तक तुम बुराई को ज़ड से नहीं मिटा सकते तब तक बह पूरी तरह से खत्म नहीं होती है।गाहे बगाहे अपनी चपेट में किसी न किसी को ले लेती है।इसलिए केवल बुराई को दूर करने की नहीं,बल्कि उसकी  जड को भी काटने की आवश्यकता है ताकि वह फिर कभी पनप नहीं सके।यदि तुमने बुराई की जड़ को काट  दोगे तो फिर तुम्हारा जीवन अपने आप सहज व शांति पूर्ण हो जायेगा


सबक
             दोस्तों बुराई को खत्म करने से कुछ नहीं होगा दरअसल हमें बुराई के कारण को ही नष्ट करना होगा।वरना समय समय पर उसके बुरे परिणाम सामने आते रहेगें.

11 comments:

  1. इस नए और सुंदर से हिंदी चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    ReplyDelete
  2. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
    http://sanskrit-jeevan.blogspot.com/ पर आकर हमारा मार्गदर्शन करें व अपने
    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    यदि आप संस्‍कृत में लिख सकते हैं तो आपको इस ब्‍लाग पर लेखन के लिये आमन्त्रित किया जा रहा है ।

    हमें ईमेल से संपर्क करें (pandey.aaanand@gmail.com पर अपना नाम व पूरा परिचय)

    धन्‍यवाद

    ReplyDelete
  3. Good lesson keshav ji.Waise anyatha na le to bataiye aacharya kyon lagaya hai?aap dharmguruon key parivar se hai kya?
    swagat ,
    dr.bhoopendra
    jeevansandarbh.blogspot.com

    ReplyDelete
  4. ब्लाग जगत में आपका स्वागत है।
    आशा है कि आप अपने लेखन से ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।



    आपके ब्लाग की स्वागत चर्चा पर जाने के लिए यहां क्लिक करें।

    ReplyDelete
  5. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

    ReplyDelete
  6. achha likha hai aapne. keep it up

    www.mydunali.blogspot.com

    ReplyDelete
  7. This is a good parable!If only the life could be as simple! This was just a cactus thorn; the evil, devil or demon of humanity is much more difficult to remove!

    ReplyDelete
  8. आज जरूरत भी इसी बात की है। अच्छा लिखा है।

    ReplyDelete